ताज़ा ख़बरें

धार्मिक पर्व हमें जगाने आते हैं इसका लाभ लेकर पुण्य प्राप्त करें,,  “राजवीर शास्त्री”

खास खबर

धार्मिक पर्व हमें जगाने आते हैं इसका लाभ लेकर पुण्य प्राप्त करें,,  “राजवीर शास्त्री”

अष्टान्हिका पर्व के समापन पर निकली श्री जिनेंद्र भगवान की रथयात्रा

खंडवा। कोई भी पर्व हमें जगाने के लिए आता है, इन पर्वो के माध्यम से हम हमारे धर्म और संस्कृति को बनाएं रखते हैं। जैन धर्म में अष्टान्हिका पर्व एक महान पर्व है और इसके माध्यम से हम मंडल विधान की पूजा अर्चना करते हुए समस्त देवताओं को एकत्रित कर भक्ति भाव से अर्घ्य चढ़ाते हैं जो हमारे जीवन के लिए पुण्यशाली होते हैं। यह उद्गार खंडवा पधारे पंडित राजवीर शास्त्री ने अष्टान्हिका पर्व के समापन अवसर पर व्यक्त किए, समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि आत्म शुद्धि के अष्टानिका पर्व के समापन पर सराफा जैन मंदिर से भगवान महावीर की रथ यात्रा निकली जो शहर के विभिन्न मार्गो से होकर धर्मशाला पहुंची, जगह-जगह पर भगवान की आरती की गई। धर्मशाला में समापन अवसर पर राजवीर शास्त्री जी ने कहा कि जैन धर्म में पर्यूषण एवं अष्टान्हिका पर्व दो महान पर्व है अपने जीवन को सफल बनाने के लिए इन पर्वों पर धार्मिक भावना जागृत रखें। साधु-संत के साथ ही श्रावक भी तप, त्याग, तपस्या कर अपने जीवन का कल्याण करते हैं। हम हमारी युवा पीढ़ी को भी ऐसे पर्व और धर्म की संस्कृति से जोड़े रखे ताकि वे आधुनिकता की इस दौड़ में भटके नहीं। ज्ञान बिना कल्याण नहीं, अत: हमें परमात्मा ने जो मानव जीवन दिया है उसका हम सद्पयोग करें और हमारे कल्याण के लिए जीवन के कुछ क्षण प्रभु भक्ति में लगाएं, कुछ समय स्वाध्याय करके धर्म को समझते हुए संस्कारित हो और दूसरों को भी संस्कारित करें, यदि हम अंधकार में जिएंगे तो हमारा विकास और हमें पुण्य लाभ प्राप्त नहीं हो सकता उजाले में जीना सीखें,श्री शास्त्रीजी ने कहा कि इन पर्वो के माध्यम से हम हमारे धर्म और संस्कृति को बनाएं रखते हैं। संगठन ने ही शक्ति हुआ करती है हम सभी एक परिवार की भांति एक साथ रहे जैन धर्म में अष्टान्हिका पर्व एक महान पर्व है और इसके माध्यम से हम मंडल विधान की पूजा अर्चना करते हुए समस्त देवताओं को एकत्रित कर भक्ति भाव से अघ्र्य चढ़ाते हैं जो हमारे जीवन के लिए पुण्यशाली होते हैं। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि गुरू पूर्णिमा के दिन 29 जुलाई बुधवार को दोपहर 1.15 बजे अष्टान्हिका पर्व के समापन पर भगवान महावीर की विशाल रथयात्रा पंडित राजवीर जी शास्त्री के सानिध्य में निकली, पर्व पर निकली इस रथयात्रा में भगवान महावीर विराजमान थे। जगह-जगह पर भक्तों ने श्रीजी की आरती उतारी। प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि श्रीजी की रथयात्रा सराफा पोरवाड़ दिगम्बर जैन मंदिर से बुधवारा, केवलराम पेट्रोल पंप, बांबे बाजार, घंटाघर, टाउन हाल, मेडिकल चौराहा, खड़कपुरा, हरिगंज होते हुए सराफा पोरवाड़  जैन धर्मशाला पहुंची जहां भगवान का अभिषेक व शांतिधारा एवं महाआरती के पश्चात अष्टान्हिका पर्व का समापन हुआ। रथ यात्रा में कांतिलाल जैन एवं अन्य साथियों ने भजनो की प्रस्तुति दी। पोरवाड़ दिगम्बर जैन समाज के मीडिया प्रभारी प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि श्रीजी की शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रीमती प्रिया प्रदीप जैन परिवार, चतुर्थ कलश करने का सौभाग्य श्रीमती सुषमा राजकुमार जैन पंधाना, श्रीजी की माल पहनने का सौभाग्य अविनाश कुमार अंकित कुमार सराफ परिवार को प्राप्त हुआ।श्रीजी के रथ के सारथी बनने का सौभाग्य श्रीमती राजकुमारी स्व. विनय चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ, श्रीजी को लेकर बैठने का सौभाग्य अविनाश कुमार सराफ को प्राप्त हुआ, रथ यात्रा में बाजी में जिनवाणी लेकर बैठने का सौभाग्य श्रीमती मधुलिका वीरेंद्र भटयांण परिवार को प्राप्त हुआ। छड़ी लेकर करने का सौभाग्य अंकित चांदमल जी सराफ एवं प्रतीक प्रमोद कुमार जी जैन परिवार को प्राप्त हुआ। इंदौर से पधारे पोरवाड़ दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष नमिष जैन का समाजजनों द्वारा सम्मान किया गया।
अष्टान्हिका पर्व में 9 दिन तक शाम के समय प्रवचन देने वाले विद्वान राजवीर शास्त्री का समाज द्वारा सम्मान किया गया। रथ यात्रा एवं प्रवचन में वीरेंद्र भट्यांण,पोरवाड़ समाज इंदौर के अध्यक्ष नमिष जैन,राजेन्द्र छाबड़ा, सुनील जैन, कांतिलाल जैन,प्रेमांशु चौधरी,रूपांशु चौधरी,देवेंद्र जैन,अरुण सराफ,निखलेश जैन,अतुल जैन,गौरव जैन,अंकित जैन,सौरभ जैन,विकास जैन,राजेन्द्र घाटे सहित सहित बड़ी संख्या में समाज जन  उपस्थित थे रथ यात्रा में कांतिलाल जैन,अंकित जैन,सौरभ जैन द्वारा भजनों की प्रस्तुतियां दी गई।कार्यक्रम का संचालन समाज के ट्रस्टी सुधांशु चौधरी ने किया।

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!